Conversational Audio - Chhattisgarhi

Our Conversational Data in Chhattisgarhi features authentic dialogues of Indians conversing in Chhattisgarhi.

Overview

Parameters and Specifications

Metadata

Sample Data

Sample Metadata

Sample Transcription

Overview

Our Conversational Data in Chhattisgarhi offers comprehensive and authentic dialogues of Indians conversing in Chhattisgarhi. This dataset features conversations that span a wide range of topics, including daily life, business, education, and more. It includes diverse speakers from different regions of India, capturing various accents and dialects to provide a rich linguistic resource. The data is collected from natural, spontaneous conversations to ensure authenticity, and each conversation is accurately transcribed with annotations for contextual understanding. Additionally, we offer the flexibility to tailor the topics, conversations, and scenarios according to the specific needs of your company, ensuring that the dataset aligns perfectly with your requirements.

Parameters and Specifications

Data type

Conversational, Labelled

Format

Audio - .wav (44100Hz, 16-bit)

Unique Speakers

2

Platform Hardware

Mobile Device

Audio Tracks

Individual Speaker Stems (Stereo)

Metadata

For each recording the following metadata will be available

Age of speakers

Gender

Social Background

Geographical Location

Recording Platform

Topic

Scenario

Accent

Dialect

Sample Data

Individual Speaker Stems

General Conversation

Duration: 0:00

Waveform loading... 0%

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Speaker 1

Audio - .wav (44100Hz, 16-bit)

Speaker 2

Audio - .wav (44100Hz, 16-bit)

1.0

0.5

0.0

-0.5

-1.0

1.0

0.5

0.0

-0.5

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Sample Metadata

Sample Transcription

You can request below to get access to our Transcription Guidelines.

Transcription Sample

Speaker 1

29, Male, Korba

[
  {
    "start": 0,
    "end": 5.82,
    "text": "हलो जय जोहार"
  },
  {
    "start": 10.29,
    "end": 25.26,
    "text": "कि सब बढ़िया आज के हमन के टॉपिक गांव सहर के बाजार खोज बीन बतावा कुछु "
  },
  {
    "start": 26.13,
    "end": 31.65,
    "text": "हव "
  },
  {
    "start": 37.95,
    "end": 38.49,
    "text": "हूं"
  },
  {
    "start": 63.39,
    "end": 65.37,
    "text": "हव "
  },
  {
    "start": 69.27,
    "end": 70.14,
    "text": "हम्म "
  },
  {
    "start": 73.11,
    "end": 75.33,
    "text": "हव हूं"
  },
  {
    "start": 85.35,
    "end": 85.98,
    "text": "हव "
  },
  {
    "start": 92.58,
    "end": 106.23,
    "text": "हव  में ह गांव के हाट बाजार लग ज्यादा पसंद करता हूं काबर गांव के हाट बाजार के समान मन ताजा  रथे "
  },
  {
    "start": 107.13,
    "end": 116.97,
    "text": "सब ले पहली जरूरी ए रहीथे समान कैसे हवये और शहर के लिए पैक करके रख रखे रखे तो वह क्वालिटी थोकन की कम हो जाय रहिथे"
  },
  {
    "start": 119.37,
    "end": 132.57,
    "text": "गांव के म ये रथे कि शोरगुल अच्छा होते बजार जाबे ता कुछु कुछु  सब्जी वबजी गांव के बजार म हर चीज सब्जी मिल जाते है जो कि शहर में"
  },
  {
    "start": 132.75,
    "end": 145.47,
    "text": "शहर मां भी मिलथे लेकिन शहर के अपेक्षा गांव मा जादा सब्जी मिल जाथे गांव के बाजार म आपन भाईचारा संग मस्ती मजाक करथन हम मन घूमत घूमत जाथन "
  },
  {
    "start": 147.6,
    "end": 162.33,
    "text": "ता वह संगवारी मन में कुछ कुछ खाई पीये लग जाथन हे हम मन गांव के बजार म हमन घुम सकथन  दुकान के में हमने एक रह रहते थे कि हमने सिर्फ दुकान में जा बो औ मतलब"
  },
  {
    "start": 162.78,
    "end": 177.69,
    "text": "पेगिंग के समान मिलही जो कि गांव में हम मन ला  छाट के लाथन छाट निमार के लाथन गांव के मां आप बताओ अ"
  },
  {
    "start": 180.3,
    "end": 180.81,
    "text": "हूं"
  },
  {
    "start": 185.1,
    "end": 187.38,
    "text": "हौ "
  },
  {
    "start": 194.94,
    "end": 195.69,
    "text": "हव "
  },
  {
    "start": 198.51,
    "end": 204.9,
    "text": "हूं"
  },
  {
    "start": 207.72,
    "end": 209.07,
    "text": "हव "
  },
  {
    "start": 213.36,
    "end": 213.84,
    "text": "हूं"
  },
  {
    "start": 231.63,
    "end": 245.01,
    "text": "हूं"
  },
  {
    "start": 247.62,
    "end": 248.19,
    "text": "हूं"
  },
  {
    "start": 253.5,
    "end": 254.04,
    "text": "हूं"
  },
  {
    "start": 257.67,
    "end": 258.36,
    "text": "हव "
  },
  {
    "start": 266.34,
    "end": 273.12,
    "text": "गॉव मन के बाजार हा"
  },
  {
    "start": 276.09,
    "end": 291.06,
    "text": "गांव के बाजार म हफ्ता में दू दिन बाजार ला लग जाथे जेमा कई झन के कहीं से कि आज सोमावार के बाजार है तब फिर तीन दिन बाद फिर रही बाजार इसे करके"
  },
  {
    "start": 291.06,
    "end": 305.76,
    "text": "हफ्ता म दू दिन बजार लग जाथे जेमा स्थानीय जगह मां मौहा मौहा तेंदू चार ओहो मिल जाथे जो कि सहर म नहीं मिल पाए"
  },
  {
    "start": 307.68,
    "end": 322.14,
    "text": "गांव म अइसे होथे कि गांव के हर समान मिल जाते जैरी बुर्बुटी पान पतै जला भाई भाजी पाला ज्यादा मिलथे"
  },
  {
    "start": 322.83,
    "end": 337.77,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 345.45,
    "end": 347.88,
    "text": "हव "
  },
  {
    "start": 350.07,
    "end": 351.57,
    "text": "हूं"
  },
  {
    "start": 355.05,
    "end": 355.65,
    "text": "हव "
  },
  {
    "start": 358.44,
    "end": 359.01,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 363.36,
    "end": 363.9,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 369.6,
    "end": 370.11,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 374.85,
    "end": 375.42,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 387.45,
    "end": 388.08,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 390.9,
    "end": 398.04,
    "text": "हूं "
  },
  {
    "start": 401.01,
    "end": 407.19,
    "text": "हूं हव "
  },
  {
    "start": 410.25,
    "end": 419.97,
    "text": "हव हूं हव "
  },
  {
    "start": 422.04,
    "end": 433.98,
    "text": "हव हूं हव"
  },
  {
    "start": 434.64,
    "end": 447.93,
    "text": "अगर हमन के दुकानदार करा अच्छा से मोल भाव होथे हमार जान पहिचान रथे तेला हमन बोलथन कि का हो कका ग भाव ल बनेच बढ़ा दे हव थोकन कम करा ना"
  },
  {
    "start": 448.65,
    "end": 462.75,
    "text": "अइसे हम मन उकर से मोलभाव करते थान ग्राहक मन दुकानदार से बोलते की कैसे मोंलभाव बनेज बाड़ गे हावे तब दुकानदार बोलथे की अभी सबजी की रेथ बाढ़त जाथे "
  },
  {
    "start": 463.56,
    "end": 476.43,
    "text": "तो ओकर लिये हमन भी रेट ला बढ़ाय हन दिये हमन ला दुकानदार मन बोलथे की हमन ला उतना कमाई नहीं होये ये दूएच रुपय मिलते फिर ग्राहाक ह बोलथे की"
  },
  {
    "start": 476.7,
    "end": 490.08,
    "text": "चला न थोकन अउ पांच रुपया ला काम करा , दुकानदार जो रेट बोल थे ,ओकर ले कम रेट मा ग्राहाक मांग थे!"
  },
  {
    "start": 490.38,
    "end": 503.91,
    "text": "दुकानदार जैसे की एकठा सम मतलब कबड़ा है तेला दुकानदार बोलथे की 300 म त ग्राहक हा बोलथे ओला 150 दिहा"
  },
  {
    "start": 505.38,
    "end": 518.73,
    "text": "तो ओमन के बीच में मोलभाव चलत रथे धीरे धीरे दुकानदार भी रेट लग कम कर डरथे फिर ग्रहक ह भी ले देके 200 बढ़ाथे 200 म कपड़ा ल देथे"
  },
  {
    "start": 518.73,
    "end": 532.14,
    "text": "फिर ओकर बाद औ कुछ ग्राहक लिया बोलथे फिर अव कुछ लेथे फिर उम्मा भी ग्राहक बोलथे कि एहू मा भी कुछ  कम करना त दुकानदार है ए सोचथे कि मुले मोर करा बने कपड़ा लेवथे"
  },
  {
    "start": 532.17,
    "end": 546.03,
    "text": "तो मैं थोकन अऊ कम कर देथ हूं उपकर बाद फिर अगर कभी ग्राहक फिर से वहीं दुकान में जाथे तो मन के अच्छा मेल मिलप बन जाथे "
  },
  {
    "start": 546.03,
    "end": 560.88,
    "text": "मेल मिलाप बने के बाद गगरहक ह जैसे बोलथे कि मोला ए रेट मत दे दे तब दुकान दार भी सोचते अब अपन एहे निकाल के तहां ले चल ले ले अब ओमन  के मोल भाव बन जाए रहिथे"
  },
  {
    "start": 560.91,
    "end": 575.34,
    "text": "त ओ मन एक दूसरा से मोलभाव कर रहे करथे कि इलाय अत्ना तत्नाम दे दे और फिर से फिर आप तो तोरेज करा ले लेबू आप बताओ कच्छो"
  },
  {
    "start": 576.12,
    "end": 576.6,
    "text": "."
  },
  {
    "start": 579.24,
    "end": 579.87,
    "text": "हा !"
  },
  {
    "start": 583.44,
    "end": 586.95,
    "text": "हम.."
  },
  {
    "start": 589.05,
    "end": 592.5,
    "text": "हूं "
  },
  {
    "start": 595.05,
    "end": 598.8,
    "text": "हव "
  },
  {
    "start": 605.76,
    "end": 606.33,
    "text": "हम.."
  },
  {
    "start": 610.89,
    "end": 611.61,
    "text": " हव "
  },
  {
    "start": 615.27,
    "end": 617.25,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 619.92,
    "end": 629.61,
    "text": "हऔ.........हऔ .....हम !"
  },
  {
    "start": 632.64,
    "end": 638.31,
    "text": "हूं हूं "
  },
  {
    "start": 640.41,
    "end": 642.33,
    "text": "हव हूं"
  },
  {
    "start": 646.86,
    "end": 661.56,
    "text": "हव हूं हव हूं हव"
  },
  {
    "start": 662.76,
    "end": 677.22,
    "text": "हूं हव हव"
  },
  {
    "start": 677.22,
    "end": 691.44,
    "text": "गांव म समान मन ए रहथे कि बहुत समान रहाथ हे रहे बर लेकिन ओमा कुछ कुछ रहथे जो हम मन के पुराना चीज़ा ताजा कर देते हैं जैसे कि महुआ के फूल ला सुखाएगे उकर"
  },
  {
    "start": 691.47,
    "end": 706.02,
    "text": "सर  बर बना दे अउ ,लड्डू बनाये रथे ,अउ महुआ के कई झन मोला देशी शराब में भी करथे !"
  },
  {
    "start": 706.11,
    "end": 718.62,
    "text": "जो की थोड़ा गला गला थे लेकिन अक्सर बाजार में वो चीज मिल थे महुआ के महुआ लग खाय खाय ला अच्छा लग थे मीठा भी रथे थोड़ा"
  },
  {
    "start": 718.74,
    "end": 732.06,
    "text": "ऐला तिहार में भी खाये ज्यादा थे और महुआ लगभग दंतेवाडा साइड में भी अच्छा मिल थे दंतेवाडा बस्तर"
  },
  {
    "start": 732.36,
    "end": 746.16,
    "text": "ओ समय महूआ अच्छा मिल जथे। ओमा ए होथे बाजार म जइसे की बांस के टोकरी बनाए रहिथे। सूपा चलनी ये सब बनाए रहिथे"
  },
  {
    "start": 746.31,
    "end": 761.19,
    "text": "कुम्हार मन मिट्टी के अच्छा अच्छा खिलोना खिलोना गाड़ी टिकडी बना रहिथे इमाँ खास बात ए रहते कि समान मन समान ला बहुत दिन से तहें यूज कर सकथ हस"
  },
  {
    "start": 762.12,
    "end": 774.33,
    "text": "एक हो थे गांव के समान और ये मा गांव मा समान में सुखा मछली करे जाथे जेला सुस्की कहथे "
  },
  {
    "start": 774.69,
    "end": 789.42,
    "text": "जैसे कि गांव मां मसाला बनाथे मसाला ला जरेर बुटी से मतलब जंगल जाके कुछ कुछ जरील तोड़ पेड़ पाउधा के फर ला तोड़ के लाथे ओला पीस के मसाला बनाथे"
  },
  {
    "start": 789.6,
    "end": 803.16,
    "text": "अऊ अक्षर "
  },
  {
    "start": 804.63,
    "end": 812.34,
    "text": "हओ"
  },
  {
    "start": 815.85,
    "end": 829.56,
    "text": "हव हूं हूं"
  },
  {
    "start": 829.89,
    "end": 837,
    "text": "हव हूं"
  },
  {
    "start": 839.31,
    "end": 854.16,
    "text": "हव हम्म हा हा "
  },
  {
    "start": 855.18,
    "end": 868.86,
    "text": "हव हूं "
  },
  {
    "start": 868.86,
    "end": 871.98,
    "text": "हव "
  },
  {
    "start": 876,
    "end": 878.43,
    "text": "हव हव"
  },
  {
    "start": 880.62,
    "end": 881.25,
    "text": "हूं"
  },
  {
    "start": 889.2,
    "end": 903.81,
    "text": "हओ...............हओ.............."
  },
  {
    "start": 905.16,
    "end": 917.4,
    "text": "हव हव"
  },
  {
    "start": 917.79,
    "end": 932.55,
    "text": "  हम ..........हम.....हम ... हओ"
  },
  {
    "start": 932.67,
    "end": 946.65,
    "text": "हव हव"
  },
  {
    "start": 947.16,
    "end": 960.66,
    "text": "हव मोर पसंद खरिदारी जगह ह बजारे हरे ब बजार म खुला मतलब खुला रस्ता म मिट्टी की रास्ता म बजार बइठे रहिथे"
  },
  {
    "start": 960.87,
    "end": 974.73,
    "text": "जब हम मन घूमत घामत हम मन  कुछ समान ला ले चल देथन हसी मजाक करत जहां दाल चावल बीज भाग कुछ कुछ भाजी पाल हम मन ला मिल जाथे "
  },
  {
    "start": 974.88,
    "end": 989.31,
    "text": "जो भी हमन मन ला,मॉल म नइ मिल पाए , भाजी पालक मॉल में  नइ मिलपाये  हमन ला ओतका मन ला।  मिलहि त  हमन ला मन ला पूछपूछ पुराना भाजी , वो मिलते जो पैक  रथे ,बाजार म अकसर  कुछु कुछु  कार्यक्रम होत  रथे !"
  },
  {
    "start": 989.43,
    "end": 1003.14,
    "text": "शुभा गीत चल जाते कपी फिर बजार में लोक गीत हो जाथे नाना नाचा गाना हो जाथे जइसे के मॉल म ये रहथे की वहाँ ठंडा हवा पंखा"
  },
  {
    "start": 1003.2,
    "end": 1018.11,
    "text": "ए होथे जहां मॉल के रेट के हिसाब से वहां वहां के समान में के रेट बाड़ जाते हैं वहां ल मिट्टी के समान मिलथे लेकिन ओमा ओ के क्वालिटी नहीं रहे जो गांव के बाजार में मिल थे"
  },
  {
    "start": 1018.14,
    "end": 1032.81,
    "text": "गांव के बजार में थोड़ा मोल भाव करके भाव ला हमन घटाए घटा डरथन हमन जैसे कि हमन पुराना ग्राहक हरन त हमन दुकानदार ल बोलथन की ला हमन तोर पुराना ग्राहक हन"
  },
  {
    "start": 1032.96,
    "end": 1045.47,
    "text": " मोलभाव ला थोकन कम कर जहां मॉल के अपेक्षा रेट फिक्स रहथे जइसे दुकानदार ओखर टर्केट टाइगर लगे रहिथे वहिच रते म हम मन ला खरीदे बर  लागथे जहां"
  },
  {
    "start": 1046.49,
    "end": 1058.37,
    "text": "ऑफर अउ डिस्काउंट त है लेकिन हमर ला फिक्स रेट म ही मिलते हैं वहाँ मॉल के समान ह बजार में बहुत बोल चाल से हम मन दाम ल घटा सकथन "
  },
  {
    "start": 1058.85,
    "end": 1073.28,
    "text": "गांव के बाजार म हमन महुवा सुखवा बांस के समान लोहे के समानला हाथ अउ हाथ से बुने कपड़ा ए हमन ला मिल जथे"
  },
  {
    "start": 1073.73,
    "end": 1088.4,
    "text": "अब हार राज्यों में लोकल लोकल मन  के रथे हैं विलाब भाग जूड़ रहते हैं जैमाला अच्छा से खरीद सकते हैं जहां मॉल के अपेक्षा ब्रांडेड कपड़ा रथे हैं"
  },
  {
    "start": 1088.55,
    "end": 1102.47,
    "text": "और पूरा भी टाइम है वह डिजिटल हो गे हवे  तो वह नाम से मतलब बजार है यह अच्छा हवे मॉल मां हाथ सी समान महंगा मिलथे "
  },
  {
    "start": 1103.37,
    "end": 1118.37,
    "text": "अपन यात्रा ला मन पसंद स्थानीय बजार के"
  },
  {
    "start": 1118.67,
    "end": 1133.67,
    "text": "हम्म हम्म हम्म"
  },
  {
    "start": 1133.67,
    "end": 1148.28,
    "text": "हूं हूं "
  },
  {
    "start": 1148.46,
    "end": 1163.34,
    "text": "हूं"
  },
  {
    "start": 1163.43,
    "end": 1177.14,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 1177.5,
    "end": 1188.33,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 1188.63,
    "end": 1199.7,
    "text": "मैं बाजार के बात करव जेमा  अच्छा से देखे मिलथे जेमा  गवाई जइसे लाग थे जैसे के बस्तर बस्तर के बाजार मैं बांस के हे गाड़े रथे जेम"
  }
]

Speaker 2

37, Male, Mungeli

[
  {
    "start": 0.06,
    "end": 9.51,
    "text": "हव हलो जय जोहार संगवारी कइसे हो"
  },
  {
    "start": 11.61,
    "end": 15.75,
    "text": "तो आ"
  },
  {
    "start": 18.21,
    "end": 30.24,
    "text": "हव  तो हम मन ला बतावन चाही कि जैसे गांव मा  हफ्ता मा सिर्फ एक दिन हाट लगथे हूं"
  },
  {
    "start": 30.66,
    "end": 44.25,
    "text": "लोग मन टोकरी बोरा लेके मन अपन अपन चीज बेचाएं ल आवत है और जैसे सबजी चना धान बकरी मुर्गा लेके"
  },
  {
    "start": 44.34,
    "end": 57.24,
    "text": "गाओं के बाजार मा आवाज हा आवथे ले ले भाईया ताजा भाजी ताजा भाजी तो सब भू हा अपन अपन के हो थे और मज़ा घलो हा वो हुच"
  },
  {
    "start": 57.54,
    "end": 72.3,
    "text": "सौदा के संग हसी मजाक बातचीत और अपनापन मिलथे और सहर का बजार मा जिसे की दुकाने चमकदार होते रेट फिक्स होते और हर चीज पैकिंग मा"
  },
  {
    "start": 72.45,
    "end": 83.7,
    "text": "मिलथे और यहां मनला भावताव करे के मौका नहीं मिलाए फिर सुविधा  जादा हा सब्बो चीज मिल जाथे एक जगा मा"
  },
  {
    "start": 83.7,
    "end": 98.31,
    "text": "और गांव के बजार में  रिश्ता अउ माटी के खुश्बू मिल थे और सहर के बजार में अराम और आधुनिकता मिल थे हमको अब तैं बतावव तैं गांव के हाट बजार ज्यादा पसंद करता है इसके सहर के माल"
  },
  {
    "start": 98.37,
    "end": 113.19,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 113.19,
    "end": 127.32,
    "text": "ब्लाक"
  },
  {
    "start": 128.34,
    "end": 142.68,
    "text": "सही बात हव"
  },
  {
    "start": 142.86,
    "end": 157.71,
    "text": "तो अगला टोपिक हव"
  },
  {
    "start": 157.95,
    "end": 167.82,
    "text": "सही बात हव सही बात हवै "
  },
  {
    "start": 167.85,
    "end": 180.48,
    "text": "अगला टापिक हवे  कि स्थानीय बजार काबर खास लगथे ये उपर गुठियावो तो जइसे कि स्थानीय बजार मा तो अपन अलग अलग ही मज़ा रहिथे"
  },
  {
    "start": 180.48,
    "end": 189.3,
    "text": "हर जगह के मला सबसे कस्त बात यह लगते कि वह हाट मा लोकल लोगन के अपन मेहनत के खुशबू रहीथे"
  },
  {
    "start": 189.3,
    "end": 202.08,
    "text": "और हर चीज चाहे भाजी होवै और लकडी के खिलोना होवै  बरतन होवै या गुड होवै तो सब अपन हाथ ले बनाया होवै"
  },
  {
    "start": 202.08,
    "end": 209.67,
    "text": "और वो बजार में केवला  खरीद बिकरी नहीं होवय, बलकि मिलन जुलन होवय"
  },
  {
    "start": 209.73,
    "end": 218.16,
    "text": "अपनापन होवे और हसी ठिठोली के माहौल रहीथे औ जइसेच म बाजार जाता हूँ"
  },
  {
    "start": 218.16,
    "end": 234.66,
    "text": "और धूल भरे रस्ता और गंध वाला हाट होते और जोर ले बुलाई वाला विकरेता होते हर जगा आजा बहनी ताजा तरकारी ले जा सुनके मन चाही शांति मिलथे ए सबला"
  },
  {
    "start": 235.29,
    "end": 246.51,
    "text": "और ओ मज़े सबसे बढ़िया लागथे कि पुराना दोस्त अचानक मिल जाथे और दाई नानी अपन ठेला लागा के मुस्कुराबत दिखथे"
  },
  {
    "start": 246.54,
    "end": 261.39,
    "text": "और अव छोट छोट दुकांदार मन अपन कला दिखाथे तो मन कह सकतो कि गाउं के स्थानीय बजार में अपन संस्कार खुजबू और अपन लोगन के जुड़ाव दिखथे"
  },
  {
    "start": 261.57,
    "end": 268.05,
    "text": "ते बताव कुछ तोला स्थानीय बजार म का सबसे ज्यादा मजा देथे "
  },
  {
    "start": 270.3,
    "end": 284.55,
    "text": "हओ"
  },
  {
    "start": 285.06,
    "end": 298.98,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 315.09,
    "end": 327.51,
    "text": "तो हो गए आगे बढ़व अगला टॉपिक हवै कि दुकानदार संग मौलभाव करें के तरीका साझा करें तो "
  },
  {
    "start": 327.54,
    "end": 341.07,
    "text": "मोलभाव के सही तरीका ये रहिथ हे कि पहली बात मुस्कुरा के बोलना दुकानदार हाँ खुश रहिथ ता तोर बात मा नरमी रहिथ जइसे कि भईया थोड़ा सस्ता कर देना"
  },
  {
    "start": 341.07,
    "end": 353.76,
    "text": "अब तो रोज ग्राहक मनला हसा देथव हो तो एकर से दुकान दा रहा भी मुस्कुरा देथे और दूसरी बात ला कि दाम के जानकारी रखव"
  },
  {
    "start": 353.91,
    "end": 366.81,
    "text": "थोड़ा इधर उधर के दुकान देख लेव त पता चल जाए कि असली रेट का  हवाएं  तो फिर बोले सकथस  कि सामने वाले हां पांच रुपया कम मां दे थे अउर"
  },
  {
    "start": 366.96,
    "end": 378.93,
    "text": "तिसरी बात हवै कि झुठी धमकी नहीं हलका मजाक कर जैसे कि आप अपन ग्राहक ला भगाना चाहतो का थोड़ा सस्ता कर देव"
  },
  {
    "start": 379.05,
    "end": 391.08,
    "text": "अगले हफ्ते फिर ले आओ और एक बार म पूरा सामान खरीद ले अगर ज्यादा सामान लेथस दुकानदार खुदे कहे कि चलो भईया तुम्हारा सब"
  },
  {
    "start": 391.11,
    "end": 404.37,
    "text": "तुम्हार सब लेवत हाओ तो पास दस रुपिया कम कर देथंव और सौदा मा सम्मान रखव हमेशा बहुत जीद नहीं करव अपन और से हसी मजाक रख"
  },
  {
    "start": 404.4,
    "end": 418.62,
    "text": "दुकानदार हाँ खुश् रहिथे और अंत मा मोल भाव एसेच करन चाही कि दोनों ला मजा आ जावे दुकानदार घलो जीते ग्राहक खुस रहे"
  },
  {
    "start": 418.65,
    "end": 427.05,
    "text": "अब तैं  बतावव तैं कबु दुकानदार संग बढ़िया मोल भाव करके सस्ता सौड़ा करे रहेस का"
  },
  {
    "start": 429.15,
    "end": 440.76,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 443.1,
    "end": 453,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 481.2,
    "end": 496.17,
    "text": "हव हव"
  },
  {
    "start": 496.59,
    "end": 511.05,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 511.23,
    "end": 525.87,
    "text": "हाउ "
  },
  {
    "start": 540.69,
    "end": 554.85,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 556.26,
    "end": 568.95,
    "text": "हव सही बात हवै त हमन ल बतान चाहन कि अगला टापिक हवै कि बजार मां मिलाय वाला अनोखा सामान उपर चर्चा करए"
  },
  {
    "start": 569.25,
    "end": 583.53,
    "text": "तो जइसे हमर छत्तीसगढ़ के हाट बजार मा जाबो ता उतका कुछ चीज मिल जाथे जेन ला देखके अपना आप हाँ कहे देथस कि अरे ये तो कहा मिलही और"
  },
  {
    "start": 583.65,
    "end": 595.35,
    "text": "धेंकीले कूटा चावल जैसे गाउ मा अबड़ कम जगह  मा मिलते फिर हाट मा एक आद दाई मलला टूकरी मा रखे रही थे"
  },
  {
    "start": 595.44,
    "end": 610.02,
    "text": "और खाय मा महकदार अउ स्वाद मा लाजवाब होथे और बेलोर माटी के बर्तन भी मिलते हैं सस्ता सुन्दर और हातले बनाया हुआ है और ए बर्तन मा पानी ठंडा रहिथे"
  },
  {
    "start": 610.02,
    "end": 622.23,
    "text": "अऊ खाना के स्वाद अलग लगथे अउ जंगल के जड़ी बूटी और देशी तेल गांव के बूढ़ी दाई मन अपन बनाये तेल और जड़ी बूटी बेचथें"
  },
  {
    "start": 622.32,
    "end": 636.75,
    "text": "बाल झड़ना  जोड दुखना सब बर दबाई और महुआ ले बनाय समान महुआ के लड्डू तेल और सुखा महुआ ये सब सहर म कहा मिलथे।"
  },
  {
    "start": 636.99,
    "end": 644.22,
    "text": "और लकडी का खिलोना और बांस का समान मिलथे खूब सुन्दर बनाये जाथे हड़िया टोकरी"
  },
  {
    "start": 644.22,
    "end": 657.03,
    "text": "पंखा और अपन माटी के गंध वाला हुनर तो बजार में घूमत घूमत जब यह अनुखा चीज दिखथे तो मन हाँ अपन संस्कृति और लोग जीवन के नजदीक लेगाथे "
  },
  {
    "start": 657.18,
    "end": 667.74,
    "text": "अब ताएं बतावा तोला बजार में कौन सा नुखा समान देखके अचंभा लागिस"
  },
  {
    "start": 670.92,
    "end": 685.92,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 686.49,
    "end": 700.17,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 700.29,
    "end": 709.29,
    "text": "सही बात हवे "
  },
  {
    "start": 711.81,
    "end": 726.69,
    "text": "आओ."
  },
  {
    "start": 727.59,
    "end": 741.54,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 742.92,
    "end": 757.14,
    "text": "सही बात"
  },
  {
    "start": 768.03,
    "end": 774.39,
    "text": "हव"
  },
  {
    "start": 774.39,
    "end": 792.78,
    "text": "अगला टापिक हवे कि विविदिता और दाम के मामले मा बाजार के तुलना माल संग कराए तो बाजार और माल के दाम मा तुलना करथन  ता पता चलते के दुनों के अपन अपन फाइदा और नुकसान हवे"
  },
  {
    "start": 792.87,
    "end": 799.86,
    "text": "चल मे बताथो कुछ जैसे की दाम बजार मा सामान सस्ता मिलथे"
  },
  {
    "start": 799.89,
    "end": 814.74,
    "text": "काबर के उतका दुकानदार मन खुद माल ला बनाथे या लोकल व्यापारी मन ला लेथे और जैसे सबजी कपड़ा जूता खिलोना सब म मोल भाव हो सके"
  },
  {
    "start": 814.8,
    "end": 826.5,
    "text": "जैसे के बाजार मा कपड़ा 300 म मिल जाही तो वो ही मॉल म 600 800म मिल ही और यहाँ ब्रांडेट चीज रहीथे मॉल में"
  },
  {
    "start": 826.53,
    "end": 838.92,
    "text": "अऊर ठंडा माहोल होथे ए_सी बिल्डिंग अऊर सिस्टम   ये सब सुविधा के दाम जुरे रहिथे तो मतलब साफ हावे के आराम जादा खर्च जादा होथे"
  },
  {
    "start": 838.98,
    "end": 853.05,
    "text": "और बजार में चीज बढ़िया हो सकते फिर सब बकत गारंटी नहीं रहे थे अगर तय समझदार ग्राहक हस  ता मोल भाव के संग क्वालिटी देखके बढ़िया खरीद सके हो"
  },
  {
    "start": 853.08,
    "end": 864.06,
    "text": "और सामान ब्रांडेट रहीथे माल म गारंटी मिल थे रिटर्न पालसी रहीथे और फिर हर चीज के दाम मा ब्रांड के टैग जुड़े जाथे"
  },
  {
    "start": 864.27,
    "end": 879,
    "text": "और एक्सपीरियंस जैसे की बता सकथो कि बजार में भीड़ बाड आवाज ठेला दुकानदार के बोल चाल अपनापन के माहौल लगथे तो मोला मजा  आथे और मॉल भाव करें मा अपन"
  },
  {
    "start": 879.18,
    "end": 893.31,
    "text": "चमकथे अउ मॉल म शांति ठंडा माहोल साफ सुथरा अउ टाइम पास अउ आराम करे ला बढ़िया जगह हावे अउ ओही जगह म दाम"
  },
  {
    "start": 893.46,
    "end": 907.89,
    "text": " मिलथे सस्ता बाजार म माल महंगा सामान लोकल मिलथे बाजार माल में ब्रांडेड मिलथे और माहोल होते भीड़भाड़ वाला बाजार मा अउ माल आमरामदायक मिलथे"
  },
  {
    "start": 907.95,
    "end": 921.33,
    "text": "सुविधा मिलते बजार में थोड़ा सा अऊ माल में ज्यादा सुविधा मिलथे मजा भी आथे कि अपनापन मिलथे माल में ज्यादा आधुनिकता का प्रचार होथे"
  },
  {
    "start": 921.39,
    "end": 936.27,
    "text": "तो रोजमर्रा के जरुरत बर बजार बढ़िया हवे खास गिफ्ट या फैसनेबल चीज पर माल ठीक हवे अब तैं बतावा तोर पसंद का खरिद दारी जगह कौन हाँ बजार की माल"
  },
  {
    "start": 1035.75,
    "end": 1043.13,
    "text": "प्रस्तुति प्रस्तुति"
  },
  {
    "start": 1071.3,
    "end": 1085.55,
    "text": " अगला टापिक पर चलते हैं अगला टापिक पर चलते हैं कि अगला अ"
  },
  {
    "start": 1085.55,
    "end": 1099.62,
    "text": " टापिक हावे की हव अगला टोपिक हवै अपन यात्राले मन पसंद स्थानीय बाजार ला याद करव"
  },
  {
    "start": 1099.71,
    "end": 1112.46,
    "text": "तये सुन  जैसे कि मोर मन पसंद स्थानी बजार हवे के मा जब गौरेला छत्तीसगढ के बिलासपुर  के पास घूमे गए रहा हराव "
  },
  {
    "start": 1112.49,
    "end": 1117.68,
    "text": "तहां के गौरेला हाट बाजार मोला बड़े भा गईस "
  },
  {
    "start": 1117.68,
    "end": 1131.84,
    "text": "बजार हर मंगलवार और शुक्रवार लगथे सुबह सबेरे सब सूरज सिरिप निकरत रहित ओ बकत लोगन मन टोकरी गोड बैला गाडी मा भर भर के सबजी फल लकडी कपड़ा अऊ"
  },
  {
    "start": 1131.96,
    "end": 1146.87,
    "text": "घरेलू चीज ले आथे त पूरा इलाका हा रंग गंद और हसी ठिठोली ले भर जाथे और हाट में गरम गरम बजिया चना चटनी और महुआ लड्डू मिलथे  जिनके खुशबू हा दूर ले मन"
  },
  {
    "start": 1146.9,
    "end": 1160.7,
    "text": "और लकडी के हथा वाला कुल्हड़ी अउ दाराती औरत मन बनाथे बास के टोकरा अउ सूपा अउ लोकल कलाकार मन के गोबर कलाव पेंटिग तहुं बता कुछ"
  },
  {
    "start": 1164.12,
    "end": 1177.92,
    "text": "तहूं बता कुछ "
  }
]